भोजपुरी लोक संगीत भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का एक जीवंत हिस्सा है। यह संगीत मुख्यतः Bihar, Uttar Pradesh के पूर्वी क्षेत्रों और Nepal के तराई इलाकों में प्रचलित है। इन गीतों में ग्रामीण जीवन, प्रेम, विरह, उत्सव, प्रकृति और सामाजिक भावनाओं की सच्ची झलक मिलती है।
भोजपुरी लोकगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज की आत्मा हैं—ये पीढ़ी दर पीढ़ी परंपराओं को जीवित रखते हैं।
🎼 भोजपुरी लोक गीतों के प्रमुख प्रकार
1. सोहर
जब किसी घर में बच्चे का जन्म होता है, तो महिलाएँ मिलकर “सोहर” गाती हैं। यह गीत खुशियों और आशीर्वाद से भरे होते हैं।
2. कजरी
सावन-भादो के महीने में गाया जाने वाला कजरी गीत प्रेम और विरह की भावनाओं को व्यक्त करता है।
3. फगुआ (होली गीत)
होली के अवसर पर गाए जाने वाले फगुआ गीत रंग, उमंग और हास्य से भरपूर होते हैं।
4. बिरहा
बिरहा गीत विरह (जुदाई) और भावनात्मक दर्द को दर्शाते हैं। यह शैली लोक गायक की गायन कला को विशेष पहचान देती है।
5. चैता
चैत्र महीने में गाया जाने वाला चैता गीत भक्ति और श्रृंगार रस से युक्त होता है।
🪕 लोक वाद्य यंत्रों की भूमिका
भोजपुरी लोक संगीत में कई पारंपरिक वाद्य यंत्रों का उपयोग होता है, जैसे:
ढोलक
हारमोनियम
मंजीरा
तबला
इन वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि गीतों में ऊर्जा और लय भर देती है।
🌾 भोजपुरी लोक संगीत की विशेषताएँ
सरल और सहज भाषा
लोक जीवन से जुड़ी भावनाएँ
सामूहिक गायन की परंपरा
त्योहारों और संस्कारों से गहरा संबंध
भोजपुरी लोक गीतों में गाँव की मिट्टी की सोंधी महक और जीवन की सादगी झलकती है।
🎤 प्रसिद्ध भोजपुरी लोक गायक
भोजपुरी लोक संगीत को नई पहचान दिलाने में कई कलाकारों का योगदान रहा है, जैसे:
Manoj Tiwari
Kalpana Patowary
Bharat Sharma Vyas
इन कलाकारों ने पारंपरिक लोकधुनों को आधुनिक मंच तक पहुँचाया है।
🌎 वैश्विक पहचान
आज भोजपुरी लोक संगीत केवल भारत तक सीमित नहीं है। Mauritius, Suriname और Fiji जैसे देशों में बसे प्रवासी भारतीयों ने भी इसे जीवित रखा है।
✍️ निष्कर्ष
भोजपुरी लोक संगीत हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। यह केवल गीत नहीं, बल्कि भावनाओं का सागर है—जिसमें प्रेम, पीड़ा, खुशी और परंपरा सब कुछ समाहित है।
यदि हम अपनी लोक संस्कृति को बचाए रखना चाहते हैं, तो हमें इन गीतों को सुनना, सीखना और अगली पीढ़ी तक पहुँचाना होगा।
🎶 “भोजपुरी लोक गीत, दिल से दिल तक की आवाज़।”